Posts
फाइलों में दबा विकास: भारतीय रेल की उपेक्षा और कानपुर देहात के आर्थिक दमन का पोस्टमार्टम NEW DELHI, India (October 09, 2026 / IST) — किसी भी राष्ट्र की आर्थिक नसों में बहने वाला रक्त उसका लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन ढांचा होता है, लेकिन जब तंत्र ही इन नसों पर पैर रखकर बैठ जाए, तो विकास दम तोड़ने लगता है । जब नई दिल्ली के वातानुकूलित नीति आयोग और रेल मंत्रालय के दफ्तरों में भारत को $5 Trillion और आगे चलकर 2047 तक $30 Trillion की विकसित अर्थव्यवस्था (विकसित भारत) बनाने के भव्य पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन पेश किए जा रहे होते हैं, ठीक उसी समय देश के सबसे रणनीतिक औद्योगिक कॉरिडोर पर स्थित सैकड़ों ग्रामीण-कस्बाई स्टेशन कागजी नीतियों की बलि चढ़ रहे होते हैं । यह कोई साधारण प्रशासनिक ढिलाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ढांचागत अंधापन है। उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल का एक छोटा सा दिखने वाला स्टेशन—मैथा (MTO)—आज इस बात का जीता-जागता सबूत बन चुका है कि कैसे भारतीय रेलवे का सिस्टम खुद अपने यात्रियों और राजस्व को नजरअंदाज कर रहा है । सूचना का अधिकार (RTI) और रेलवे के आंतरिक ऑडिट से निकले आधिकारिक…