इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन 2026: $18 अरब का निवेश और ग्लोबल सिलिकॉन वॉर
India bets $18B on the Indian Semiconductor Mission 2026 to break a 95% import crisis. Will this crash global supply chains by 2030.
इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन 2026: $18 अरब का निवेश और ग्लोबल सिलिकॉन वॉर नई दिल्ली, भारत — वैश्विक भू-राजनीति के बिसात पर चिप्स (Chips) केवल सिलिकॉन के टुकड़े नहीं, बल्कि 21वीं सदी के नए परमाणु हथियार हैं। जो देश इस तकनीक को नियंत्रित करेगा, वही दुनिया की अर्थव्यवस्था और संप्रभुता को नियंत्रित करेगा। भारत ने इसी वैश्विक वर्चस्व की जंग में अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। ₹76,000 करोड़ का इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) कोई सामान्य सरकारी योजना नहीं है, बल्कि ताइवान, चीन और अमेरिका के सिलिकॉन एकाधिकार को सीधी चुनौती है। लेकिन क्या ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक के निजी पूंजी प्रवाह (Private Capital) के साथ शुरू हुआ यह महा-अभियान वाकई भारत को एक 'चिप सुपरपावर' बना पाएगा, या फिर हम एक अरबों डॉलर के रणनीतिक चक्रव्यूह में फंस रहे हैं? सच्चाई यह है कि वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 90% से 95% सेमीकंडक्टर आयात करता है। जब भी आप एक स्मार्टफोन छूते हैं, ईवी (EV) स्टार्ट करते हैं, या वेंटिलेटर चालू करते हैं, तो भारत की आर्थिक संप्रभुता का एक हिस्सा बीजिंग या ताइपे की ओर बह जाता है। इस ऐतिहासिक आयात निर्भरता (Import Dependency) को तोड़ना अब विकल्प नहीं, बल्कि वजूद की लड…