India UK FTA Impact 2026: $120B Trade Growth & Industry Analysis
भारत-UK FTA के असर से 120 अरब डॉलर का बड़ा बदलाव हो रहा है। लग्ज़री इंपोर्ट पर टैरिफ कम होने से, क्या घरेलू मैन्युफैक्चरर्स 2030 में आने वाले मार्केट
India UK FTA Impact 2026: $120B Trade Growth & Industry Analysis नई दिल्ली, भारत — मुक्त व्यापार के नाम पर वैश्विक मंचों पर होने वाली कागजी सौदेबाजी जब हकीकत की जमीन पर उतरती है, तो वह किसी अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बनती है या फिर घरेलू उद्योगों के लिए एक मीठा जहर? जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के हस्ताक्षरों के बाद अब धरातल पर उतर रहा यह भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कोई सामान्य व्यापारिक समझौता नहीं है। यह वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक उपनिवेशवाद के नए दौर की वह बिसात है, जो अगले दो दशकों के लिए वैश्विक वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन का नया नक्शा खींचने जा रही है। तथाकथित मुक्त व्यापार के इस खेल में जहां एक तरफ 120 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का झुनझुना थमाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू मैन्युफैक्चरर्स के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। क्या यह समझौता भारतीय बाजार को विदेशी विलासिता के सामानों का डंपिंग ग्राउंड बना देगा, या फिर हमारे टेक्सटाइल और लेदर सेक्टर्स को वैश्विक सप्लाई चेन का नया बादशाह बनाएगा? इस गहराई से बुने गए आर्थिक ताने-बाने के पीछे छिपे असली सच को बिना किसी लाग…