भारत के राज्यों की Per Capita GDP: क्या $15k का लक्ष्य अब मुमकिन नहीं लगता?

भारत के राज्यों की GDP में ज़बरदस्त उछाल के पीछे अमीरी-गरीबी का एक गहरा अंतर छिपा है। जहाँ दिल्ली चमक रही है. वहीं UP नेपाल जैसी स्थिति में है।
भारत के राज्यों की Per Capita GDP: क्या $15k का लक्ष्य अब मुमकिन नहीं लगता?
नई दिल्ली, भारत — क्या भारत वाकई एक आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है, या हम केवल बड़े आंकड़ों के मुखौटे के पीछे छिपी एक भयानक असमानता को छिपा रहे हैं? जब नीति निर्माता टेलीविजन स्टूडियो में बैठकर ₹50,00,000 करोड़ की अर्थव्यवस्थाओं का जश्न मनाते हैं, तो वे चतुराई से उस कड़वे सच को दबा देते हैं जो भारत के रेलवे स्टेशनों, लेबर चौकों और झुग्गी-झोपड़ियों में साफ दिखाई देता है। जीडीपी (GDP) के बड़े आंकड़े आपको गर्व से भर सकते हैं, लेकिन जब आप जेब में रखे असली पैसे यानी प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) की वास्तविकता को टटोलते हैं, तो यह भ्रम ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। हम एक ऐसे देश में जी रहे हैं जहां एक राज्य की सीमा पार करते ही आप स्विट्जरलैंड जैसी आधुनिकता से सीधे उप-सहारा अफ्रीका जैसी गरीबी के दलदल में कदम रख देते हैं। यह विश्लेषण किसी सरकारी पीआर एजेंसी की चिकनी-चुपड़ी रिपोर्ट नहीं है; यह भारत के आर्थिक भूगोल का वह नग्न सच है जिसे समझने की हिम्मत आज के नीति निर्माताओं में नहीं है। आइए इस चमकते हुए आर्थिक गुब्बारे में पिन चुभोकर इसके भीतर की हवा को बाहर निकालते हैं। बड़े राज्यों…