भारत का e-₹ (Digital Rupee): क्या $5 ट्रिलियन रेमिटेंस मार्केट पर पड़ेगा इसका असर?
भारत की e-₹ (CBDC) का लक्ष्य 2030 तक $5 ट्रिलियन के बाज़ार तक पहुँचना है, ऐसे में CBDC के ज़रिए सीमा-पार लेन-देन (cross-border settlement) से जुड़े अह
भारत का e-₹ (Digital Rupee): क्या $5 ट्रिलियन रेमिटेंस मार्केट पर पड़ेगा इसका असर? नई दिल्ली, भारत — वैश्विक वित्तीय गलियारों में इस समय एक अदृश्य लेकिन बेहद आक्रामक युद्ध चल रहा है। यह युद्ध बंदूकों या मिसाइलों से नहीं, बल्कि कंप्यूटर कोड, सॉवरेन एल्गोरिदम और डिजिटल लेजर के जरिए लड़ा जा रहा है। दुनिया जिस $5 ट्रिलियन के ग्लोबल रेमिटेंस मार्केट को देखती है, वह असल में बैंकिंग बिचौलियों की एक ऐसी जागीर है जो दशकों से आम निवेशकों और संप्रभु राष्ट्रों का खून चूस रही है। लेकिन अब, भू-राजनीतिक बिसात पलट चुकी है। क्या भारत का डिजिटल रुपया (e-₹) साल 2030 तक अमेरिकी वर्चस्व वाले SWIFT और यूरोप समर्थित mBridge इकोसिस्टम को उखाड़ फेंकेगा? यह केवल एक तकनीकी सवाल नहीं है; यह वैश्विक वित्तीय संप्रभुता की रीराइटिंग है। दशकों से, बेल्जियम स्थित SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) नेटवर्क ने वैश्विक भुगतानों पर एकछत्र राज किया है। जब भी कोई देश सीमा पार पैसा भेजता है, तो उसे कई कॉरेस्पोंडेंट बैंकों के मकड़जाल से गुजरना पड़ता है। परिणाम? भारी-भरकम फीस, 3 से 5 दिनों का सेटलमेंट समय , और वाशिंगटन के हाथों में एक ऐसा वित्तीय हथियार जो किसी भी देश को एक झटक…